आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक क्या है?

सीधे शब्दों में कहें तो, आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक को अंग्रेजी में MBBS कहते हैं। इसका मतलब होता है—Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery। यह एक ऐसा कोर्स है जो आपको डॉक्टर बनने की योग्यता देता है।

इस कोर्स में छात्र पहले चिकित्सा (Medicine) के सिद्धांत सीखते हैं और फिर शल्य चिकित्सा (Surgery) यानी ऑपरेशन करने की जानकारी लेते हैं। इसीलिए इसे कहा जाता है आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक

क्यों करें आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक?

अगर आपका सपना लोगों की सेवा करना है, उन्हें ठीक करना है, तो यह कोर्स आपके लिए सबसे अच्छा है। इस कोर्स के बाद आप एक योग्य डॉक्टर बन सकते हैं जो लोगों की जान बचा सकता है।

इसके अलावा यह कोर्स बहुत इज्जतदार होता है। समाज में डॉक्टर को बहुत मान-सम्मान मिलता है।

कैसे करें आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक की पढ़ाई?

इस कोर्स में एडमिशन के लिए सबसे पहले आपको 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी लेना होता है। उसके बाद NEET नाम की परीक्षा पास करनी होती है।

NEET में अच्छा स्कोर करने के बाद आपको सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सीट मिलती है, जहाँ आप आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक की पढ़ाई करते हैं।

पढ़ाई की अवधि कितनी होती है?

आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक की पढ़ाई कुल 5.5 साल की होती है। इसमें 4.5 साल का कोर्स और 1 साल की इंटर्नशिप शामिल होती है।

इस दौरान छात्र मानव शरीर, बीमारियों की पहचान, इलाज, ऑपरेशन, और दवाइयों की जानकारी सीखते हैं।

क्या-क्या पढ़ाया जाता है?

कोर्स के दौरान यह विषय पढ़ाए जाते हैं:

  • शरीर रचना (Anatomy)
  • शरीर क्रिया विज्ञान (Physiology)
  • रोग विज्ञान (Pathology)
  • औषध विज्ञान (Pharmacology)
  • शल्य चिकित्सा (Surgery)
  • स्त्री रोग एवं प्रसूति (Gynaecology)
  • बच्चों की चिकित्सा (Paediatrics)
  • मानसिक रोग (Psychiatry)

इन सब के साथ छात्रों को अस्पताल में जाकर प्रैक्टिकल काम भी करना होता है।

कोर्स के बाद क्या विकल्प हैं?

जब आप आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक पूरा कर लेते हैं, तो आपके पास कई रास्ते होते हैं:

  1. सरकारी डॉक्टर बनना: सरकारी अस्पताल में नौकरी कर सकते हैं।
  2. प्राइवेट प्रैक्टिस: खुद का क्लिनिक खोल सकते हैं।
  3. हायर स्टडीज: MD, MS, या अन्य स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं।
  4. विदेश में पढ़ाई: विदेश जाकर आगे की पढ़ाई और प्रैक्टिस कर सकते हैं।
  5. शिक्षा क्षेत्र: मेडिकल कॉलेज में टीचर बन सकते हैं।

कितना पैसा खर्च होता है?

अगर आप सरकारी कॉलेज में पढ़ते हैं तो फीस बहुत कम होती है। लेकिन प्राइवेट कॉलेज में यह खर्च लाखों में हो सकता है।

फिर भी, ये खर्च एक निवेश की तरह होता है क्योंकि एक डॉक्टर बनने के बाद आपकी कमाई अच्छी होती है।

क्या इसमें मेहनत लगती है?

बिलकुल, आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक आसान कोर्स नहीं है। इसमें बहुत पढ़ाई, समय, और प्रैक्टिकल अनुभव की जरूरत होती है। लेकिन अगर आपका मन सच में डॉक्टर बनने का है, तो यह मेहनत आपको कभी भारी नहीं लगेगी।

कौन-कौन सी संस्थाएं प्रसिद्ध हैं?

भारत में कई नामी मेडिकल कॉलेज हैं जो यह कोर्स कराते हैं:

  • AIIMS (दिल्ली)
  • JIPMER (पुदुचेरी)
  • KGMU (लखनऊ)
  • MAMC (दिल्ली)
  • CMC (वेल्लोर)

इन कॉलेजों में एडमिशन पाना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन अगर मेहनत करें तो नामुमकिन नहीं।

निष्कर्ष

आखिर में यही कहेंगे कि आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक सिर्फ एक कोर्स नहीं, यह एक जिम्मेदारी है। इसमें आपको लोगों की जिंदगी से जुड़ा काम करना होता है। अगर आप मेहनती हैं और समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो यह कोर्स आपके लिए सबसे उपयुक्त है।

यह रास्ता लंबा है, पर मंज़िल बहुत ऊँची है।